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दिल्ली में हसीना, ढाका में ज़िया का बेटाबांग्लादेश चुनाव क्यों बने हैं भारत की ‘नेबरहुड वॉच’ का बड़ा फोकस

Last Updated: February 12, 2026

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दिल्ली में हसीना, ढाका में ज़िया का बेटा
बांग्लादेश चुनाव क्यों बने हैं भारत की ‘नेबरहुड वॉच’ का बड़ा फोकस

बांग्लादेश में होने वाले आगामी आम चुनाव सिर्फ वहां की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत की विदेश और पड़ोसी नीति के लिए भी बेहद अहम बन गए हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली में सक्रिय मौजूदगी है, तो दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान के बेटे की ढाका की राजनीति में बढ़ती भूमिका। यही वजह है कि बांग्लादेश चुनाव भारत की “Neighbourhood Watch” यानी पड़ोसी देशों पर करीबी नजर की रणनीति का बड़ा केंद्र बन गए हैं।

बांग्लादेश में क्यों है यह चुनाव अहम?

बांग्लादेश इस समय:

• राजनीतिक ध्रुवीकरण।

• आर्थिक दबाव।

• और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक खींचतान।

के दौर से गुजर रहा है। सत्तारूढ़ अवामी लीग और विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच मुकाबला तेज होता जा रहा है। ज़िया परिवार की राजनीति में दोबारा सक्रियता ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

शेख हसीना की दिल्ली मौजूदगी का क्या मतलब?

शेख हसीना और भारत के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। उनके कार्यकाल में:

• भारत-बांग्लादेश सुरक्षा सहयोग बढ़ा।

• भारत विरोधी उग्रवाद पर सख्ती हुई।

• पूर्वोत्तर भारत के लिए कनेक्टिविटी आसान बनी।

• व्यापार और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा मिला।

भारत के लिए हसीना का नेतृत्व स्थिरता और भरोसे का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में उनका दिल्ली से करीबी संवाद भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

ज़िया के बेटे की वापसी और विपक्ष की मजबूती

ज़ियाउर रहमान के बेटे की सक्रिय राजनीति में वापसी से BNP समर्थकों में नई ऊर्जा दिख रही है। ऐतिहासिक रूप से BNP सरकारों का रुख:

• भारत के प्रति ज्यादा सतर्क या आलोचनात्मक।

• चीन के साथ करीबी।

• सुरक्षा और सीमा मुद्दों पर अलग दृष्टिकोण रहा है।

यही कारण है कि भारत इस बदलाव को लेकर सतर्क नजर बनाए हुए है।

भारत बांग्लादेश चुनावों पर क्यों रख रहा है कड़ी नजर?

1️⃣ सीमा और सुरक्षा का सवालभारत-बांग्लादेश की लंबी सीमा है। हसीना सरकार के दौरान:

सीमा पार उग्रवाद में कमी आतंकी नेटवर्क पर नियंत्रण सुरक्षा सहयोग मजबूत हुआ। राजनीतिक बदलाव से यह संतुलन प्रभावित हो सकता है।

2️⃣ कनेक्टिविटी और व्यापारभारत की Act East Policy बांग्लादेश पर काफी हद तक निर्भर है।चुनावी नतीजों से:

ट्रांजिट प्रोजेक्ट्स बंदरगाह उपयोग ऊर्जा सहयोग पर असर पड़ सकता है।

3️⃣ चीन का बढ़ता प्रभावचीन बांग्लादेश में:

इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्ट प्रोजेक्ट रक्षा सहयोग के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। भारत नहीं चाहता कि ढाका का झुकाव किसी एक दिशा में बहुत ज्यादा हो।

4️⃣ क्षेत्रीय स्थिरताबांग्लादेश दक्षिण एशिया की उभरती अर्थव्यवस्था है। अगर चुनाव:

विवादितया अस्थिरहोते हैं, तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत सार्वजनिक रूप से कहता है कि:

बांग्लादेश का चुनाव उसका आंतरिक मामला है। वहां की जनता ही अपना नेतृत्व चुनेगी लेकिन कूटनीतिक स्तर पर भारत हर संभावित नतीजे के लिए तैयारी और आकलन कर रहा है।

चुनाव नतीजों से क्या बदलेगा?

हसीना की जीत → भारत-बांग्लादेश रिश्तों में निरंतरता

BNP की वापसी → नीतियों में बदलाव, नए समीकरण दोनों ही हालात में भारत को अपनी रणनीति के अनुसार कदम उठाने होंगे।

निष्कर्ष

दिल्ली में हसीना और ढाका में ज़िया के बेटे की सक्रियता ने बांग्लादेश चुनावों को भारत की पड़ोसी नीति के केंद्र में ला दिया है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि इसका असर दक्षिण एशिया की राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक संतुलन पर भी पड़ेगा। इसीलिए बांग्लादेश के चुनाव भारत की “Neighbourhood Watch” के लिए सबसे अहम घटनाओं में शामिल हो गए हैं।

📌 Disclaimer

यह लेख राजनीतिक विश्लेषण और सार्वजनिक जानकारियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य सूचना देना है, न कि किसी पक्ष का समर्थन करना।