Kuldeep Yadav ने रचा 21वीं सदी का विश्व रिकॉर्ड 68 साल बाद इतिहास दोहराने वाले बने पहले खिलाड़ी

Last Updated: October 14, 2025

1 Min Read

Share

Kuldeep Yadav ने रचा 21वीं सदी का विश्व रिकॉर्ड 68 साल बाद इतिहास दोहराने वाले बने पहले खिलाड़ी

नई दिल्ली, अक्टूबर 2025:भारतीय टीम के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जो पिछले 68 सालों से कोई भी गेंदबाज़ नहीं कर पाया था।कुलदीप ने टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 15 मैचों में 5 बार 5 विकेट हॉल लेकर एक नया विश्व रिकॉर्ड (World Record) बना दिया है।उन्होंने इंग्लैंड के जॉनी वार्डल (Johnny Wardle) का 68 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

🔹 कैसे बना यह रिकॉर्ड

वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन (Day 3), कुलदीप यादव ने अपनी घूमती गेंदों से कैरेबियाई बल्लेबाज़ों को पूरी तरह पस्त कर दिया।उन्होंने 20 ओवर में 5 विकेट झटके और मात्र 49 रन दिए।इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने न सिर्फ भारत को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि व्यक्तिगत रूप से एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी दर्ज की।यह उनका करियर का पाँचवां “फाइव-फॉर” (5-विकेट हॉल) था — और खास बात यह है कि उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 15 टेस्ट मैचों में कर दिखाया।

🔹 कौन थे जॉनी वार्डल

इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिनर जॉनी वार्डल (Johnny Wardle) के नाम था, जिन्होंने साल 1957 में टेस्ट करियर में 5 बार 5 विकेट लेने का आंकड़ा 28 मैचों में छुआ था।यानि, लगभग 68 साल बाद, किसी लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिनर ने उनसे भी तेज़ यह मुकाम हासिल किया है — और वह हैं भारत के कुलदीप यादव।

🔹 कुलदीप यादव के करियर का ग्राफ

श्रेणी आँकड़ा (अक्टूबर 2025 तक)खेले गए टेस्ट मैच 15विकेट्स की संख्या 74+5-विकेट हॉल 5बेस्ट बॉलिंग फिगर 6/40औसत (Bowling Average) लगभग 22.00स्ट्राइक रेट 44.5इकॉनमी 2.90इन आँकड़ों से साफ़ है कि कुलदीप यादव का टेस्ट करियर अभी छोटा है, लेकिन बेहद प्रभावशाली है।उनकी गेंदों की विविधता और नियंत्रण उन्हें आधुनिक युग का सबसे खतरनाक लेफ्ट-आर्म चाइनामैन स्पिनर बनाती है।

🔹 68 साल बाद टूटा रिकॉर्ड — क्यों खास है यह उपलब्धि

1. इतिहास दोहराया गया:पिछली बार ऐसा रिकॉर्ड 1957 में बना था — यानी कुल 68 साल बाद किसी खिलाड़ी ने इस तरह की उपलब्धि दर्ज की।

2. लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिनर का दुर्लभ रिकॉर्ड:क्रिकेट इतिहास में लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिनर बहुत कम हुए हैं।इस कला को “चाइनामैन बॉलिंग” कहा जाता है, और कुलदीप आज के दौर में इसके सबसे बड़े प्रतिनिधि हैं।

3. तेज़ गति से उपलब्धि हाँ वार्डल ने 28 टेस्ट में 5 फाइव-फॉर हासिल किए, वहीं कुलदीप ने यह कारनामा सिर्फ 15 मैचों में पूरा किया — लगभग आधे मैचों में।

4. भारत के लिए गौरव का क्षण:भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई स्पिनर रहे — अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, अश्विन —लेकिन कुलदीप यादव पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने यह दुर्लभ उपलब्धि इतनी तेजी से हासिल की।

🔹 वेस्टइंडीज़ के खिलाफ मैच का हाल

वेस्टइंडीज़ की टीम तीसरे दिन भारतीय गेंदबाज़ों के सामने टिक नहीं सकी।कुलदीप यादव ने पारी की शुरुआत में ही टॉप ऑर्डर को हिला दिया।उनकी गेंदें टर्न और बाउंस दोनों दे रही थीं, जिससे बल्लेबाज़ पूरी तरह भ्रमित हो गए।उन्होंने 5 विकेट लेकर मेजबान टीम को 200 रन के अंदर समेटने में अहम भूमिका निभाई।कप्तान रोहित शर्मा ने मैच के बाद कहा कुलदीप का प्रदर्शन शानदार था। उन्होंने विकेट से जो मदद मिली, उसका पूरा फायदा उठाया।उनके आने से हमारे स्पिन अटैक को एक अलग धार मिलती है।

🔹 विशेषज्ञों की राय

पूर्व भारतीय कप्तान और कमेंटेटर सुनील गावस्कर ने कहा केकुलदीप यादव आज भारत के सबसे प्रतिभाशाली स्पिनर हैं।उनका नियंत्रण और वैरिएशन पुराने जमाने के स्पिनरों की याद दिलाता है। वहीं हरभजन सिंह ने ट्वीट किया यह सिर्फ रिकॉर्ड नहीं,बल्कि कुलदीप की कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का नतीजा है। 68 साल बाद किसी भारतीय का नाम इस सूची में आना गर्व की बात है।

🔹 कुलदीप यादव का सफर

कुलदीप यादव उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से आते हैं।उन्होंने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत तेज़ गेंदबाज़ के रूप में की थी, लेकिन कोच की सलाह पर स्पिनर बने।उनकी चाइनामैन गेंदबाज़ी (लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिन) ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई।उन्होंने 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट में डेब्यू किया था। जहाँ उन्होंने पहली पारी में ही 4 विकेट लिए थे।तब से अब तक, उन्होंने कई बार भारतीय टीम को संकट से निकाला है और अब उनका नाम 21 वीं सदी के रिकॉर्डधारकों में दर्ज हो गया है।

🔹 निष्कर्ष

68 साल बाद कुलदीप यादव ने क्रिकेट इतिहास में वह अध्याय दोहराया है जो शायद अब तक केवल किताबों में ही पढ़ा जाता था।उन्होंने दिखाया कि कला, नियंत्रण और निरंतरता से कोई भी खिलाड़ी विश्व रिकॉर्ड रच सकता है।कुलदीप यादव न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। क्योंकि उन्होंने यह साबित किया है कि पुराने रिकॉर्ड तोड़ने के लिए पुरानी कला को नई सोच से जोड़ा जा सकता है।

👉 कुल मिलाकर कुलदीप यादव ने 21 वीं सदी में एक ऐसा कीर्तिमान बनाया है जिसे हासिल करने में दुनिया के बाकी गेंद बाज़ों को कई दशक लग सकते हैं।वह अब उस दुर्लभ क्लब में शामिल हो गए हैं। जहाँ 68 साल तक कोई प्रवेश नहीं कर पाया था।