AIIMS विवाद: नर्स की शिकायत पर विभागाध्यक्ष हटाए गए, फैकल्टी धरने पर—बहाली की मांग तेज
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में कार्डियो-थोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग से जुड़े एक बड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। एक महिला नर्सिंग अधिकारी की शिकायत के बाद वरिष्ठ सर्जन डॉ. ए.के. बिसोई को 11 अक्टूबर 2025 को विभागाध्यक्ष पद से हटाया गया और कार्यवाहक प्रमुख के रूप में प्रो. वी. देवगौरु को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस कदम के तुरंत बाद AIIMS फैकल्टी एसोसिएशन ने इसे “प्राकृतिक न्याय” के विपरीत बताते हुए धरना शुरू कर दिया और बहाली की मांग तेज हो गई। 0
- शिकायत के बाद 11 अक्टूबर को HOD बदला गया; फैकल्टी बहाली की मांग पर धरने पर। 1
- फैकल्टी का आरोप—बचाव का समुचित अवसर नहीं मिला; प्रक्रिया पर सवाल। 2
- नर्सेज़ यूनियन—मामला गरिमा व न्याय का; POSH गोपनीयता नियमों का पालन आवश्यक। 3
टाइमलाइन: घटना कैसे आगे बढ़ी?
| तारीख | घटना | संदर्भ |
|---|---|---|
| 30 सितंबर 2025 | महिला नर्सिंग अधिकारी ने कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार/उत्पीड़न संबंधी शिकायत दर्ज की। | 4 |
| 4–9 अक्टूबर 2025 | नर्सेज़ यूनियन ने अतिरिक्त प्रतिवेदन दिए; मामला PMO तक पहुँचा। | 5 |
| 10–11 अक्टूबर 2025 | प्रशासन ने डॉ. बिसोई को HOD पद से हटाया; प्रो. वी. देवगौरु को कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया। | 6 |
| 17 अक्टूबर 2025 | AIIMS फैकल्टी ने रामलिंगसवामी बोर्ड रूम में धरना/सिट-इन शुरू किया; बहाली की मांग। | 7 |
| 18–19 अक्टूबर 2025 | मीडिया रिपोर्ट्स में “सस्पेंशन” बनाम “पद से हटाना” पर स्पष्टीकरण; AIIMS का कहना—डॉ. बिसोई निलंबित नहीं। | 8 |
महत्त्वपूर्ण स्पष्टता: उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार यह “निलंबन (Suspension)” नहीं बल्कि “प्रशासनिक पद से हटाना”/चार्ज परिवर्तन है—यानी रोजगार समाप्ति नहीं। 9
दोनों पक्षों के तर्क—क्या कहा जा रहा है?
फैकल्टी एसोसिएशन (FAIMS) के बिंदु
- निर्णय से पहले पर्याप्त सुनवाई/जवाब का अवसर नहीं मिला—प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन। 10
- ICC के दायरे में लंबित शिकायत की प्रतियां यूनियन के साथ साझा करना प्रक्रिया से बाहर है। 11
- वरिष्ठ सर्जन की प्रतिष्ठा पर एकतरफा़ असर; बहाली तक धरना जारी। 12
नर्सेज़ यूनियन/समर्थक पक्ष के बिंदु
- यह “डॉक्टर बनाम नर्स” नहीं बल्कि कार्यस्थल गरिमा व सुरक्षा का प्रश्न है। 13
- POSH की धारा 16 के अनुसार शिकायत/पहचान की गोपनीयता सर्वोपरि—सार्वजनिक बहस से बचना चाहिए। 14
- दबाव की राजनीति निष्पक्ष जांच में बाधा हो सकती है; संस्थान को स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। 15
कानूनी परिप्रेक्ष्य: POSH कानून और गोपनीयता
POSH (Prevention of Sexual Harassment) Act, 2013 कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए व्यापक ढांचा देता है—जिसमें Internal Complaints Committee (ICC), समयसीमा, अंतरिम राहत, और गोपनीयता प्रावधान शामिल हैं। विशेषतः धारा 16 शिकायत, पक्षकारों की पहचान, गवाही और कार्यवाही के विवरण के प्रकाशन/संचार पर रोक लगाती है, ताकि जाँच निष्पक्ष रहे और शिकायतकर्ता/गवाह सुरक्षित रहें। 16
न्यायालयों और नीति-विश्लेषकों ने भी स्पष्ट किया है कि धारा 16 का उद्देश्य मीडिया/जन-डोमेन में जानकारी का प्रसार रोकना है; इसका मतलब यह नहीं कि सक्षम मंचों पर कानून के अनुरूप सामग्री पर विचार न किया जा सके। अतः संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया में गोपनीयता के साथ तथ्यों का मूल्यांकन अपेक्षित है। 17
- पहचान का खुलासा शिकायतकर्ता/गवाह पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। 18
- गैर-प्रक्रियात्मक “लीक” या बयानबाज़ी जांच को प्रभावित कर सकती है। 19
AIIMS प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
- प्रक्रियात्मक न्याय — क्या हटाने/चार्ज बदली से पहले पर्याप्त प्रतिनिधित्व अवसर मिला? फैकल्टी का सवाल यही है। 20
- गोपनीयता बनाम पारदर्शिता — POSH की धारा 16 का पालन करते हुए सूचना-साझाकरण का सही दायरा तय करना। 21
- संस्थागत माहौल — डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, प्रशासन और यूनियनों के बीच भरोसा बहाल करना। 22
- संचार रणनीति — “निलंबन” बनाम “पद से हटाना” जैसे शब्दों पर स्पष्ट, समयबद्ध स्पष्टीकरण देना। 23
ग्राउंड रियलिटी: धरना, ध्रुवीकरण और सार्वजनिक धारणा
रामलिंगसवामी बोर्ड रूम में “सिट-इन” एक अभूतपूर्व कदम माना जा रहा है—यह अलग-अलग फैकल्टी धड़ों को एक मुद्दे पर जोड़ रहा है और प्रशासन बनाम स्टाफ तनाव को सतह पर ला रहा है। मीडिया कवरेज ने मुद्दे को राष्ट्रीय बहस बना दिया है, जहाँ एक ओर प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय पर चर्चा है, दूसरी ओर कार्यस्थल सुरक्षा और लिंग-गरिमा पर। 24
क्या दांव पर है? (Impact Analysis)
- रोगी देखभाल: लंबे धरने/अंतर्घाती तनाव से शेड्यूलिंग, ऑपरेटिव लिस्ट और वार्ड समन्वय प्रभावित हो सकते हैं। (संस्थागत जोखिम—सामान्य अवलोकन)
- कर्मचारी मनोबल: “हम बनाम वे” की ध्रुवीकरण प्रवृत्ति टीमवर्क और परस्पर सम्मान घटा सकती है। 25
- नीतिगत उदाहरण: POSH प्रक्रियाओं के अनुपालन की मिसाल के रूप में यह मामला भविष्य की आंतरिक नीतियों को दिशा देगा। 26
आगे का रास्ता: समाधान के सुझाव
- टाइम-बाउंड ICC जांच: साक्ष्यों की सूची, गवाह/दस्तावेज़, और पक्षों को सुनना—सभी तय समयसीमा में। (POSH नियमावली का पालन) 27
- इंटरिम सेफगार्ड्स: यदि आवश्यक हो तो शिकायतकर्ता की ड्यूटी/शिफ्ट/रिपोर्टिंग लाइन बदलना, बिना करियर पर प्रतिकूल असर के। (सामान्य POSH प्रैक्टिस) 28
- संवाद तंत्र: फैकल्टी, नर्सेज़ और प्रशासन के प्रतिनिधियों का समन्वित मंच—गोपनीयता उल्लंघन से बचते हुए। 29
- संचार स्पष्टता: “निलंबन नहीं, पद से हटाना/चार्ज परिवर्तन” जैसी बातों पर आधिकारिक, लिखित स्पष्टीकरण। 30
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या डॉ. बिसोई को निलंबित किया गया है?
AIIMS के स्पष्टीकरण के अनुसार नहीं—मीडिया में आई कुछ सुर्खियों के विपरीत, यह “निलंबन” नहीं बल्कि HOD पद से हटाना/चार्ज बदलना है। 31
क्या फैकल्टी धरना औपचारिक संगठन की पहल है?
रिपोर्टों के मुताबिक, फैकल्टी एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से सिट-इन का निर्णय हुआ और रामलिंगसवामी बोर्ड रूम में धरना शुरू हुआ। 32
POSH की धारा 16 में क्या प्रावधान हैं?
धारा 16 शिकायत, पक्षकारों/गवाहों की पहचान, कार्यवाही व सिफारिशों के प्रकाशन/संचार पर रोक लगाती है—मीडिया/जन-डोमेन में विवरण साझा नहीं किए जा सकते। 33
निष्कर्ष
AIIMS दिल्ली का यह प्रकरण केवल किसी एक व्यक्ति या विभाग तक सीमित नहीं है—यह भारत के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में प्रक्रियात्मक न्याय, कार्यस्थल सुरक्षा और गोपनीयता के संतुलन का कठिन परीक्षण है। एक ओर फैकल्टी “सुने जाने” के अधिकार पर जोर देती है, दूसरी ओर नर्सिंग पक्ष POSH गोपनीयता व गरिमा की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है। समाधान का रास्ता पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष ICC जांच, तथा हितधारकों के बीच विश्वास-निर्माण से होकर जाता है। आने वाले दिनों में प्रशासन की संवाद-रणनीति और प्रक्रियात्मक दृढ़ता ही संस्थान की साख तय करेगी। 34






