बिहार की आस्था का अपमान’: राहुल गांधी के ‘छठ पूजा ड्रामा’ बयान पर BJP का तीखा हमला

Last Updated: October 30, 2025

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‘बिहार की आस्था का अपमान’: राहुल गांधी के ‘छठ पूजा ड्रामा’ बयान पर BJP का तीखा हमला

नई दिल्ली, अक्टूबर 2025: कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। उन्होंने हाल ही में एक सभा में छठ पूजा को लेकर टिप्पणी की, जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार की आस्था पर “सीधा प्रहार” बताया है। राहुल के “छठ पूजा का ड्रामा” कहने पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे ‘बिहार और पूर्वांचल की भावनाओं का अपमान’ करार दिया।


1️⃣ राहुल गांधी का बयान क्या था?

राहुल गांधी ने कथित रूप से एक सभा में कहा था — “हर त्योहार को राजनीति का ड्रामा बना दिया गया है, यहां तक कि छठ पूजा तक।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और भाजपा ने तुरंत पलटवार किया।

राहुल के बयान को लेकर लोगों ने कहा कि छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की पहचान है। इसलिए इसे “ड्रामा” कहना लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।


2️⃣ BJP का जवाब: ‘यह बिहार का अपमान है’

BJP नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को “बिहार और हिंदू संस्कृति का अपमान” बताया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा — “छठ पूजा माताओं-बहनों की आस्था का पर्व है। राहुल गांधी का यह बयान निंदनीय और अस्वीकार्य है।”

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस हमेशा से भारत की संस्कृति और परंपरा का मज़ाक उड़ाती रही है। यह बयान उसी मानसिकता को दिखाता है।


3️⃣ अमित शाह और नित्यानंद राय का पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता न तो भारत की संस्कृति को समझते हैं, न ही जनभावनाओं को। “राहुल गांधी और उनकी पार्टी का डीएनए ही भारतीय परंपराओं के खिलाफ है,” शाह ने कहा।

वहीं बिहार से केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा — “राहुल गांधी ने बिहार की मातृशक्ति और आस्था का अपमान किया है। छठ केवल त्योहार नहीं, बल्कि समर्पण और पवित्रता का प्रतीक है।”


4️⃣ बिहार में छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है, जो मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाता है। यह चार दिवसीय पर्व शुद्धता, तप और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान महिलाएँ निर्जला व्रत रखकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

  • ☀️ पहला दिन: नहाय-खाय
  • 🌾 दूसरा दिन: खरना
  • 🌅 तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
  • 🌞 चौथा दिन: उषा अर्घ्य

इस पर्व को “आस्था का महाकुंभ” कहा जाता है, इसलिए किसी भी नेता के द्वारा इसे “ड्रामा” कहना जनता को नागवार गुज़रा।


5️⃣ सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के बयान के बाद #छठ_का_अपमान और #BiharWithFaith जैसे हैशटैग ट्विटर (X) पर ट्रेंड करने लगे। हज़ारों लोगों ने राहुल गांधी से माफी माँगने की माँग की। कुछ यूज़र्स ने लिखा — “जो व्यक्ति छठ की पवित्रता नहीं समझता, वो भारत की आत्मा को नहीं जानता।”


6️⃣ कांग्रेस की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता ने सफाई दी कि राहुल गांधी के बयान को “गलत तरीके से प्रस्तुत” किया गया है। उन्होंने कहा कि राहुल का इरादा किसी की आस्था को ठेस पहुँचाने का नहीं था, बल्कि राजनीति में “त्योहारों के दुरुपयोग” पर टिप्पणी थी।

हालाँकि भाजपा ने इसे “क्लासिक डैमेज कंट्रोल” बताते हुए खारिज कर दिया।


7️⃣ बिहार की सियासत में नया विवाद

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरम है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर पूरे राज्य में “छठ सम्मान यात्रा” शुरू करने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद धार्मिक भावनाओं और वोट बैंक दोनों को प्रभावित कर सकता है।


✨ निष्कर्ष

छठ पूजा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि बिहार की पहचान और गर्व का प्रतीक है। राहुल गांधी का यह बयान भले ही किसी और संदर्भ में दिया गया हो, लेकिन इसका असर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर दिखाई दे रहा है। भाजपा इसे “आस्था बनाम अपमान” के रूप में जनता के बीच पेश करने में जुट गई है।

“बिहार की आस्था को कोई चुनौती नहीं दे सकता — छठ पूजा हमारे संस्कार का हिस्सा है।”


⚠️ चेतावनी और सुझाव (Disclaimer & Suggestions)

  • 🔹 यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों पर आधारित है।
  • 🔹 यहाँ व्यक्त विचार संबंधित व्यक्तियों के बयान पर आधारित हैं।
  • 🔹 यह सामग्री केवल सूचना और विश्लेषण के उद्देश्य से लिखी गई है।
  • 🔹 पाठकों से अनुरोध है कि धार्मिक विषयों को संयम और सम्मान के साथ समझें।

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